...

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सालगिरह 🙂💔
Back on my favourite type of writing 😁


वो......

एक फैसला बापू का तीन घरों की खुशियां खा गया,
दो साल के बाद देख फिर बर्बादी का दिन आ गया
कितना सुंदर कितना प्यारा वो दौर ए मुहब्बत था,
पर खुशियों के ऊपर फिर से ग़म का बादल छा गया।

कोई कितना भी हो खास पर तेरे जैसा प्यार मिला न,
बन गया आशिक मुझे जीवन भर तेरा प्यार मिला न,
24 महीने पूरे हुए देख गोदी में कोई लाल खिला न,
जख्म आज भी हरे हैं मलहम सा कभी प्यार मिला न।

कलम कर रही कत्ल मेरा दिल कहता है रोले मयंक,
ढके हुए रहने दे तू अब बंद पिटारे क्यों खोले मयंक,
ये काला दिन फिर से आया देख मेरे प्यारे जीवन में,
एक इल्तिज़ा...