...

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हादसा??...
लाशों के बीच ढूँढ रहे हैं वो अपने
चकनाचूर हुए हैं तमाम मासूम लोगों के सपने

मंज़िल तक पहुँचने का सबने लिया तो था टिकट
क्या मालूम था परिस्थितियाँ इस तरह हो जायेंगी विकट

निकले थे उम्मीद से कि पहुंचेंगे जल्दी ही अपने घर
ये कैसी विडम्बना कि छा गया इतना खौफ़ मंज़र

टुकड़े टुकड़े बिखरा पड़ा है रेलगाड़ी का वो हर डिब्बा
मम्मी है लहूलुहान उधर, इधर बच्चा ढूँढ रहा किधर है बप्पा

मलबे के ढेर से एक धीमी आवाज़ तो आई है
दौड़ी वो बहन सोच लगता है वही मेरा भाई है

लाशों के ढेर में खोज रहा खो गया जिसका अपना
शायद साँस बाकी हो अभी, तलाश जारी अभी थोड़ा और है रखना

हादसा कहो अब या कि कहो किसी की गलती
कितने मासूमों की जिंदगी इस दुर्घटना ने बदल दी

मुआवज़ों की होड़ लगाकर लाचारों को क्या छलते हो
गलतियों पर पर्दा डालने को क्या खूब शोर करते हो...


© bindu