...

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यूं शर्तों पे प्यार कौन करता है?
कभी कसमें, कभी वादे,
कभी शिकवे कभी यादें,
इन कमजोर शाखाओं पर
एतबार कौन करता है?
यूं शर्तों पे प्यार कौन करता है ?
ज़मीर, यकीं, नवाज़िश, दिलनवाजी, ईमान,
जाने क्या क्या छिपाए बैठे है अपने अस्तर में
अब बतलाइए भला
खोटे सिक्कों से कारोबार कौन करता है?
यूं शर्तों पे प्यार कौन करता है?
आंधियां नहीं थी, महज हवा का एक झोंका था
बिखर गए सारे पत्ते, फूल डालियां लिए हुए
चलिए चलते यहां से, अगले मोड़ पर
इतनी देर तलक, अब इंतजार कौन करता है ?
यूं शर्तों पे प्यार कौन करता है ?
कोई न कोई आ ही जाता है
आग लगाने मेरे आशियाने में
वो हुनरमंद है फिर बना ही लेंगे
यही सोच कर बार बार बेज़ार कौन करता है?
यूं शर्तों पे प्यार कौन करता है?

© वियोगी (the writer)