आब-ए-चश्म :-[
इश्क़ में जान देने की बात बहुत पुरानी है
चंद टूटे वादे बस यही आख़री निशानी है
चांद फ़ीका पड़ जाए ऐसा रू है उसका
फरेबी है तो क्या, वो चेहरा बहुत नूरानी है
वक्त का मरहम लगा घाव ...
चंद टूटे वादे बस यही आख़री निशानी है
चांद फ़ीका पड़ जाए ऐसा रू है उसका
फरेबी है तो क्या, वो चेहरा बहुत नूरानी है
वक्त का मरहम लगा घाव ...