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ठीक हो जाएगा सब!!😊🙏🙏
कोई तो दर्द आज बाहर आया है जो इस महामारी को फैलाया है ,

समझाया था! इंसान को भगवान नहीं है तू जिसने पर्यावरण को मजाक बनाया
आज घर से बाहर निकलने को तरसते हैं लोग कल घर के अंदर थे तो बरसते थे लोग

चीजों का गुमान था औरत का ना सम्मान था मुठभेड़ थी आपस में जीतने की न सीखने की सिखाने की ,
डराते थे कागज के नोटों से,
अब ना कागज रहें ना नोट ,
सिले रहे सब होट,
पूछते थे तेरा ठिकाना कहां है,
नोटों पर चलने वाला जमाना कहां है ,
बैठे हो घर में खाते हो रोटी ख्वाब ऊंचे सीख हेछोटी !
छोटी सीखने सबके मनो को जगाया किसी का दिल ना तोड़ो यह बताया ,
दिल टूटता है तो आह ! निकलती है तुम्हारी भूल संसार पर गुजरती है ,
आज बैठे हैं घरों में चुप्पी थामे,
अपने कर्मों की सजा किससे मांगे,
जब वह रोया था मेरे सामने तो हंस रहा था मैं !
बेखौफ सा हुआ पाप को बुन रहा था मैं!
अब बेखौफ से खौफ में जी रहा हूं ।

ढूंढ रही है नजर उस इंसान जो रो कर गई थी मेरे द्वार पर
ओ इंसान मन से पश्चाताप कर हो सके तो किसी के हाथ को थाम कर सहारा दे संसार को
नया नजारा दे जिसमें बहती हो सकून की हवाएं सुंदर लगे ये फिजाएं
दिल किसी का तोड़ना नहीं लापरवाही से मुंह मोड़ना नहीं ठीक हो जाएगा सब अच्छे संस्कारों को छोड़ना नहीं।😊🙏🙏