...

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जाने दो
आखिर क्या कसूर है उस नन्हें से परिंदे का,
किस गलती की सजा दे रहे हो उसे तुम जो पिंजरे में कैद करके रखा है उसे तुमने।

छोड़ दो उसे ,उड़ जाने दो नील गगन में
मत कैद करो इस तरह लौह - पिंजरे में उस नादान , मासूम , नन्हें परिंदे को तुम।

जिस तरह दिन - रात कैद करके रखे हो पिंजरे में उस नन्हें, मासूम परिंदे को तुम,
उसी तरह से खुद भी कभी किसी के कैद में दिन- रात रह पाओगे तुम भी क्या ??

वो बहता जल पीने के आदी है और तुम उसे कटोरी गिलास में पानी पिला रहे हो,
कभी खुद भी किसी के कैद में रहकर तुम अपने कंठ से पानी नीचे उतार पाओगे क्या??

जिस तरह से तुम पिंजरे में कैद करके उसे स्वछंद रूप से जीने पर पाबंदी लगा रहे हो
उसी तरह से किसी के कैद में रहकर तुम अपने ऊपर लगे पाबंदी सहन कर पाओगे क्या?

जिस तरह से तुम पिंजरे में कैद करके उसे अपने परिजनों से दूर और अलग रख रहे हो,
उसी तरह तुम किसी के कैद में रहकर अपनों से अपने आप को कभी अलग रख पाओगे क्या??

जिस तरह से तुम पिंजरे में कैद करके उसे अपने सपनों की उड़ान भरने से रोक रहे हो
उसी तरह से किसी के कैद में रहकर तुम अपने सपनों से समझौता कर पाओगे क्या??

जिस तरह से पिंजरे में कैद करके उसे तुम अपने अनुसार जिंदगी जीने पर मजबूर कर रहे होहो,
उसी तरह से किसी के कैद में रहकर उसके इच्छानुरूप अपनी जिंदगी तुम जी पाओगे क्या??

जब तुम किसी की दासता में अपनी जिंदगी जीना तनिक भी स्वीकार नहीं कर सकते,
तो फिर क्यों उस नन्हें परिंदे को पिंजरे में कैद करके अपनी इच्छाएँ उस पर थोप रहे हो??

छोड़ दो उसे ,उड़ जाने दो नील गगन में
मत कैद करो इस तरह लौह - पिंजरे में उस नादान , मासूम , नन्हें परिंदे को तुम।

— Arti Kumari Athghara(Moon) ✍✍

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