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जा रहा है...🌹🌹✍️✍️ (गजल)
प्यार कहीं और लुटाया जा रहा है
हम पे बस तरस खाया जा रहा है

रोतों को ये दुनिया और रूलाती है
यहां हंसतों को हंसाया जा रहा है

जाल फेंकके मोहब्बत के नाम का
सच्चे लोगों को फंसाया जा रहा है

हम इतने भी बुरे नहीं है 'सत्या'
जितना हमको बताया जा रहा है

सीरत हो गयी है बद से बद्तर
और सूरत को चमकाया जा रहा है

पसीने छूट गये हैं दबाते- दबाते
फिर भी सच को दबाया जा रहा है

धर्म के नाम पर दंगे फसाद हो रहे
घर गरीबों का जलाया जा रहा है

जंगलों के जंगल साफ करा करके
बस एक पौधा लगाया जा रहा है


© Shaayar Satya