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मोटीवेशन कविता..🔥🔥✍️✍️
जीत का तिलक लगा श्रम से तू ललाट पर
मोह ले तू उर सभी का प्रेम अपना बांट कर
कौन धोखा दे रहा है भूल जा तू क्या हुआ
एक पुष्प रह गया है आंधी से बचा हुआ
मन से तू स्वीकार कर ले दुख दर्द जो मिलें
हौसला बढ़ाएंगी ये जिंदगी की मुश्किलें
धर्म कर्म रकम और स्वयं को पवित्र कर
तुम अच्छा चित्रकार है तो जिंदगी को चित्र कर
और लगन लगा रोना ना अपनी हार पर
जीत जब तक ना हो कोशिश तू बार-बार कर
चांद बनके जिंदगी को अपनी तू भी जगमगा
छोड़ के कुकर्म सारे मन को लक्ष्य पर लगा
दया क्षमा सुकर्म निश्वार्थ का तू भाव रख
वेद काव्य देश और ग्रन्थों से लगाव रख
चोट देख आ न जाये अब चरित्र मान पर
उंगली कोई उठ न जाये तेरे स्वाभिमान पर
वाणी कर्म वचन से जन का दिल दुखे न ध्यान कर
हौसलों के पर लगा के धूम आसमान पर
लगा के दुर्गुणों की आहुति पूर्ण कर ले साधना
चलेगा खोना पाना ये जीवन की है विडंबना
ले समय तू सोच ले खुद से कभी प्यार कर
गलतियां जो हो गयी हो उनका भी सुधार कर
कदम कदम पर आ तुझे डरायेंगी ये आंधियां
धीरज लगन से पायेगा तू खूब सूरत वादियां
अज्ञानता का है अंधेरा क्रान्ति की भोर कर
लाल लाल दृग अपने दुश्मनों की ओर कर
भूल गया क्या तुझे भी बात वो भी याद है
बन के कायर बैठा है तू शेर की औलाद है
साहस कहां चला गया है नाड़ियों में पानी क्या
ठण्डा पड़ गया है लहू ढल गयी जवानी क्या
फिर से देख पड़ न जाये पैरों में बेड़ियां
वतन बेच खा रहे हैं देश के ये भेड़िया
तू वीर है सपूत है उठकर के एक दहाड़ दे
तू हौसला करे तो पहाड़ों को भी उखाड़ दे
वीर धीर हो अधीर तिरंगा दिल से पूजते
जान की बाजी लगा कर रण में जो जूझते
मुरझाया है हिमालय गंगा मैली हो गई
राजनीति विष से दुनिया विषैली हो गई
कैसे मैं कहूं कि देश पूर्णतः महान है
आज भी सड़कों पे बच्चे छत आसमान है
ढूंढते हैं आज भी कूड़ेदानों में बच्चे रोटियां
कैसे चढ़ेगा तुम बताओ देश मेरा चोटियां


© Shaayar Satya