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एक उम्र का सफ़र
// #एकउम्र_कासफ़र //

एक पूरी उम्र का लम्बा सा सफ़र,
जिंदगी ने देखे जीवन चारों पहर;
सावन फुहार शरदऋतु शीतलहर,
बसंत के सुमन ग्रीष्म ऋतु कहर।

एक पगडंडी लकीर सी खींचे पैर,
मुख पर उकरा लकीरों का शहर;
कत्लो -गारद- लूट तमस के पहर,
तीज़ त्योहार कभी माता की महर।

हर लकीर नयी गाथा नया शहर,
हर कहानी एक बहती सी नहर;
मुख नूर से नहाया नायाब शहर,
अतं कभी अमृत तो कभी ज़हर ।

नयन पट चला सदी का चित्रपट,
मुख पट पर भाव करते खट पट;
गहरा अनुभव दर्शाती श्वेत लट,
मुख पे बिखर इत उत रहीं भटक।


© Nik 🍁