...

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ज़िंदगी की गुत्थी
ज़िंदगी की गुत्थी

पूछा जब उन्होंने
कि बता ज़िंदगी है क्या
माहिर ने जवाब में
इल्म की इमारत कर दी खड़ी
मुझसे पूछा तो मैं ने कहा
एक बूंद बारिश में
छलकता प्रतिबिंब मानो जैसा।
@obliviousruma

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