...

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धड़क उठा दिल और सांसे भी बढ़ने लगी
धड़क उठा दिल
और सांसे भी बढ़ने लगी
मैं पगली उसे देख के
मचलने लगी ,
बनाके रखती थी
दूरियां जिससे
करीब उसके जाने
लगी......

धड़क उठा दिल
और सांसे भी बढ़ने लगी
मैं उसके प्यार में
हद से ज्यादा बढ़ने लगी ,
छुप छुपके अकेले में आहे
भरने लगी......

धड़क उठा दिल
और सांसे भी बढ़ने लगी
जीती थी मैं कल तक
खुद के लिए,
वो आज उसपे मरने लगी
नादानी में जाने मैं क्या क्या
करने लगी......

धड़क उठा दिल और
सांसे भी बढ़ने लगी
अब पल पल उसकी
कमी मुझे खलने लगी,
उसके प्यार
मैं जैसे मछली
पानी बिन तड़पती है
वैसे मैं भी तड़पने लगी......

धड़क उठा दिल और
सांसे भी बढ़ने लगी
दिल मैं लगी आग
और मैं जलने लगी,
उसे बिन देखे चिंता हुई
और उसके करीब आते ही
बैचेनी सी बढ़ ने लगी.......

धड़क उठा दिल और
सांसे भी बढ़ने लगी......!



© miss j