...

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बिना उसके जिन्दगी नही।
पतझड़ के मौसम में अक्सर सुखे पत्तो का ढेर नजर आता है ।
उसके बिना जिन्दगी में हर पल विरान नजर आता है ॥
दुर तक ढुढती है नजरे मेरी उसी को ।
उसके बिना तो मुझे अपना जिस्म भी बेजान नजर आता है ॥
ख्याल उसका जहन से जाता नही कभी
बरसते हुए सावन में बस उसका चहेरा नजर आता है ॥
युं तो जिन्दगी में तकदीर बदल नही सका कोई 'किसी की ।
में और मेरी तन्हाई में यादो का पहरा . नजर आता है ॥