...

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चाहिए कि
चाहत मैं इक-दूजे की फ़िकर होनी चाहिए
इस बात की तुझ को भी ख़बर होनी चाहिए

इक रौशनी रहती तो है मुसलसल मेरी राह में
मुझ पे तेरी फिर भी सदा नज़र रहनी चाहिए

जैसे जैसे चलूँ हो रहा हूँ मंज़िल से दूर मैं
ज़रूर बर-अक्स मेरी सफ़र होनी चाहिए

हटाओ ज़ुल्मत को, ज़ाहिर मी शवद
इस ही रात में कहीं सहर होनी चाहिए
© AeyJe

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