...

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क्यों
मेरी रूह भी, अब थक रही है,
अरसे से यह दर्द जो सह रही है,
क्यों नहीं मिटती यह तेरी यादें,
क्यों नहीं सुनी जाती मेरी फरियादे,


ज़िन्दगी से खफा सा है मेरा वास्ता,
अंधेरों से गिरा सा है मेरा रास्ता,


क्यों यह सूरज की किरणें मुझ तक पहुंचती नहीं,
क्यों मेरे दिल की आवाज तुझ तक पहुंचती नहीं।
© mukeshyasdiary.blogspot.com