...

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तुझमे मुझमें बिरसा समाया
ए जंगली झाड़ियों!

खत्म हो गया तेरा सपूत आज

खून की होली खेलते खेलते हैं

जहर दे दिया उसे आज

ना वह तड़पाना छटपटाया

बस मा मा कहकर बुलाया

तेरी झाड़ियों के कांटो की

सेज बना तू उसे सुला

उसके गांडीव को चीर डाल तू

मशाल बना तू उसे जला

उस मशाल को लिए हाथ चल

उसका जंगल-जंगल नाम पुकार

हरे घास का सूखा तिनका

तुझे मिलेगा हर उस पथ पर

जिस पर चलकर बिरसा मुंडा

पाया शहादत तेरा होकर

यह झाड़ियां जंगल नदियां

उसकी मां मौसी और सखियां

मरा वो उनकी लाज बचाते हैं

दिया विष उसको क्रूरतम था

रोया तब सूरज बरसा बादल भी

आकाल से तड़पी धरती
कर उठी हाहाकार भी

बिरसा गया फिर से जन्मेगा

जब अत्याचार बढ़ेगा, वह फिर से लोगों को संगठित करेगा

यह दौर चलता रहेगा उस वक्त तक

जब तक शैतान हारता नहीं
और भगवान जीतता नहीं। बालों की भजन भजन भजन