...

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तकलीफ़
कोइ तकलीफ देता है कोई मरहम लगाता है।
मेरे तस्वीर के आगे ख़ुद कि तस्वीर लाता है।
पेशानी पर लिखा मेरे बिछड़ जाना फ़िर एक दिन।
जबाना गम दिया मुझको ओ फिर मरहम लगाता है।
कोई तकदीर से बिछड़ना कोई तस्वीर से बिछड़ा ।
मेरे तस्वीर के आगे ख़ुद कि तस्वीर लाता है।
मिली मुझको ज़बाने की बड़ी बिखरी हुई यादें।
जबाना बोलता मुझको क्यूं आपना " हम" लगाता है।
कोई तकलीफ़ देता है कोई मरहम लगाता है।
स्व रचित( अभिमन्यु)
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