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खँडहर ✍️✍️✍️
सोते से उठाकर बेशक कहर ढाया है
मुझे गुनहगार ठहराने ये शहर आया है
करलो ये कोशिश शिद्दत से इस दफे
जिन्दा हूँ पर बस खंडहर ही छुपाया है
मैंने खुदमें कुछ दाखिल ही नहीं रखा
चंद साँसों का रोशनदान सरकाया है
खुदके गुनाहों की माफ़ी क्या माँगू
प्रायश्चित खुद...