...

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स्कूल के दिन
चलो ले चलूं तुम्हे,
उस बचपन की दुनिया में!!
आखें तकती थी घड़ी की सुई को
और मन घंटी में लगता था!!
दोस्तों के न आने पर ,
स्कूल न जाने का वो बहाना भी अजीब था !!
फर्स्ट बैंच पर हक जो सिर्फ हमारा था
जो न जाए हम स्कूल
पूरा बैंच ही खाली रहता था!!
बचपन में जहां जाने से रोते थे
वही जाने का कोई न कोई बहाना होता ही था !!
यादें भी अजीब है उस जमाने की
सब बहाने छूट गए स्कूल न जाने की !!
टीचर भी जहां परेशान थे हमसे कल तक
आज वो भी मिलने का बहाना देखते है !!
दोस्तों में जिंदगी थी और
अपना अलग ही फसाना था !!
स्कूल न जाने का वो बहाना भी अजीब था
फर्स्ट बैंच पर हक जो सिर्फ हमारा था !!
तीन दोस्तों का वो ग्रुप
पूरे स्कूल में भी हक सिर्फ हमारा था!!
आज याद आता है वो सारे दिन ,
कैसे रहा नहीं जाता था
सारे दोस्तों के बिन !!
सारी बातें सारी हरकतें!!
© Namrata Mahato
#schoollife