...

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इश्क़ जहर
उससे शिकायत और उसीके गले लगकर रोए
ये दिल जागे रातभर फिर उसीके सीने से लिपटकर सोए

बातों से उसकी चोट खाए और उसीके लफ्ज़ो में मरहम पाए
दूरी दे जाए जो बरसों की उसकी एक आवाज़ पे मिलने जाए

दिल रोके दिल बात करे दिल माने रूठ जाए
ये इश्क़ कैसा ज़हर है मीठा 'प्रित' जीये न मर जाए


© speechless words