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मेरा जन्म
मेरा जन्म

कोख मे थी मैं मां के ,
बस एक महिना हुआ था ।
ए खुशी की खबर सुनकर,
मेरा परिवार खुशी से झुल रहा था।
सबको लगा इस बार बेटा होगा,
और वही हमारा वंश आगे चलायेगा ।
होगा वह घर का राजकुमार,
वही हमारा नाम रोशन करेगा ।
तीन महिने हो गये ,
और बेटा होगा या बेटी ये सब सोचने लगे।
मैं अंदर से डर रही थी ,
मुझे मत मारना ऐसी भीख मांग रही थी।
लेकीन मां भी क्या करती ,
वह अपने सास के सामने लाचार थी ।
बेटी हो गई तो तुझे भी मार देंगे ,
इस डर से परेशान थी ।
फिर एक दिन मांं ने फैसला किया ,
और हॉस्पिटल में चली गई ,
बेटा है या बेटी यह चेक करने के लिये,
उसने डॉक्टर को रिश्वत भी दे दी।
लेकीन डॉक्टर इमानदार निकला,
कोख में बेटी होते हुये भी ,बेटा है कह दिया।
एक झुठ कहकर ही उसने ,
उस दिन मेरा जीवन बचा लिया था ।
जैसे तैसे नौ महिने पुरे हुये,
और में इस दुनिया में आ गई।
बेटी हुई है यह सुनकर ,
सभी के चेहरे पर उदासी छा गई ।
कुछ साल तक तो
मै अपशकुनी कहलाई,
तुने बेटी क्यो पैदा की?
इसपर मां को खरी खोटी सुनाई।
दादा दादी ने तो ,
पोती मानने से ही इनकार किया ।
मुझे मां के हाथो में सोंपकर ,
उसे घर से बाहर निकाल दिया।
लेकीन तब कोई था मुझसे प्यार करने वाला ।
कोई था मेरे लाड करने वाला।
वह इंसान मेरा बाबा ही था ,
उस डॉक्टर को धन्यवाद देने वाला ।
यही हकीकत है और,
मेरे जन्म की यही कहानी है ।
और यह सिर्फ मेरी नहीं बल्की,
हजारो लडकीयों की कहानी है ।


रचनाकार_साक्षी ढेरे