...

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किताब
मेरी दोस्त हैं , मेरी सखी है वो
जानती मेरे दिल का सब हाल है वो।
मेरी आंसुओं की गवाह है वो ,
मेरी दिल की धड़कन को बढाते अहसास है वो।
रूठ जाऊं मुझे मनाने कि हर कला जानती है वो,
रो दु तो हंसा दे, ऐसी है वो
मेरे हर नखरे उठाती है वो।
मेरे अकेले पन की साथी है वो
बिखर जाऊं तो मुझे
संभालती है वो
सोचु कि लगती है मेरी क्या वो
सच कहूं तो मेरी हमसफर है वो ।
मेरी किताबें ही तो सबसे पहला प्यार मेरा है वो।
मेरे हर ग़म की अकेली गवाह है वो।
कभी कभी सोचती हूं न होती किताबें
मुझ रोती को हंसाता कौन।
क्योंकि ये किताबें ही तो मेरी सच्ची दोस्ती है।