दिल की गजल
दिल की गजल
आंखों की आफताब हो
प्रिय धड़कन
तुम एक किताब हो
लिखता जाता हूं मिटाता नहीं
स्याह की उभरती दास्तांन हो
मोहब्बत की जैसे तुम
फूलों की गुलदान हो
एहसास समेटे
मीठी-मीठी मुस्कान हो
प्रिय स्मृति
तू चेहरा खिला-खिला आसमान हो
कहें तुम्हें
तू धड़कन तू जान हो
सिंगार की देवी
प्रिय रंग गुलाब समान हो
तुम्हें सजाऊं
हिए आंखों की, दिल की अरमान हो
चाहत...
आंखों की आफताब हो
प्रिय धड़कन
तुम एक किताब हो
लिखता जाता हूं मिटाता नहीं
स्याह की उभरती दास्तांन हो
मोहब्बत की जैसे तुम
फूलों की गुलदान हो
एहसास समेटे
मीठी-मीठी मुस्कान हो
प्रिय स्मृति
तू चेहरा खिला-खिला आसमान हो
कहें तुम्हें
तू धड़कन तू जान हो
सिंगार की देवी
प्रिय रंग गुलाब समान हो
तुम्हें सजाऊं
हिए आंखों की, दिल की अरमान हो
चाहत...