...

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हे गुरुदेव!
हे गुरुदेव! जन्म जन्मांतर तक आप रहे गुरु
मित्रता की हमारी यही एक मात्र कामना।
कामना यही कि चिरकाल तक आप बने रहे गुरुमित्र
सदैव सुगंधित रहे मित्रता की यह भावना।।

भावना जो यह जुड़ा है हृदय से
सदैव बने रहेंगे हमारे संबंध।
संबंध जो यह बन गया
कदापि न होगा खंड।।

खंड खंड जब कुछ लोगों ने किया
आपने था थामा हमारा हाथ।
हाथ जो आपने थाम लिया
प्रतीत हुआ श्रीकृष्ण हैं अर्जुन के साथ।।

साथ पार्थ के जैसे श्रीकृष्ण थे आए
उसी भाँति हम गुरुदेव से पाए मिल।
मिल गया जो गुरुदेव का साथ
अंधकार में गया प्रकाशपुंज खिल।।

खिल गया जो प्रकाशपुंज
अंधकारमयी रात्रि हुई प्रकाशवान।
प्रकाशवान आपने किया हमारा जीवन
हे गुरुदेव! आपको कोटि कोटि प्रणाम।।

प्रणाम है सहस्रों बार आपको गुरुदेव
धूल से निर्मित किया चट्टान।
चट्टान जो यह निर्मित हुआ
उसे दें अपने चरणों में स्थान।।

स्थान अपने चरणों में देकर
करे हमारा सर्वोच्च सम्मान।
सम्मानित है आपके चरणों की धूल
हे गुरुदेव! आप हैं महान।।

#त्रिभ्यूट_इन_इंक
© Ayush Ranjan

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