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मां :समर्पण का दूसरा नाम
तुम आओ रात में थके हुए
वो दिन भर की थकी फ़िर भी
तुम्हारी राह तकती रहे
मन न हो तुम्हारा तो काम मत करो ना
वो तो करेंगी ही
भले शरीर दिन भर बुखार में तपती रहे
तुम्हारी इच्छा नहीं कोई बात नहीं
क्या फ़र्क पड़ता है चाहे वो थकती रहे
न जाने लाती है इतनी हिम्मत कहाँ से
तुम सो चैन से भले वो भूख से सिसकती रहे
तुम घर में शहज़ादी बनकर रहो
भले वो तुम्हारी पसंद के कपड़े लाने के लिए दिनभर काम की तलाश में भटकती रहे
भले हो वो घर के कोने में बैठी
फ़िर भी घर मंदिर जैसी महकती रहे
जिस सर पर हो ऐसी मां का हाथ
तो फ़िर कैसे ना सन्तान चिड़ियों सी चहकती रहे
ख़ुदा करें नवाज़े वक्त हर किसी को उन खुशबुओं से जब मां की आंचल सर पर
आशीर्वाद बन फ़िसलती रहे
हो किस्मत इतनी मेहरबान हम पर
जीवन भर मां की ममता बरसती रहे
कोई ना बच जाए ऐसी औलाद
जो मां की ममता के लिए तरसती रहे
मम्मी आज ये खाना है,
मम्मी आज मुझे ये चाहिए
हर एक लफ़्ज़ों में गुरुर हो मां का
मत करो मेरी मम्मी कर देगी
बिना उनके घर का कहाँ कोई काम होता है
इतना प्रेम स्वयं भगवान भी ना दे सके
जितना त्याग है वो कर देती
भगवान भी है झुकता जिन चरणों में
समर्पण तो मां का दूसरा नाम होता है।।


© Princess cutie