...

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बस भूल गए काले साए को
आजाद खुली हवा में जी रहे
थे बेफिक्र अभी अभी तो
पास रहना सीखा था

भूल गए थे काले साए को
अभी अभी तो रंग देखा था

ख्वाब सा जो लगता
जो बस दूर से दिखता
नराजो का बसा सपना
अभी अभी तो रूबरू
हुआ था

जितना सोचा उसे कोमल
आंखे गहरी बिल्कुल सपनो
जैसा लगता था
अभी अभी तो पास बैठा था

बस भूल गए थे साए काले को
जंजीरों के पहरेदार को

बहुत कुछ कहना और करना
बाकी था उसे रूबरू हो कर
अभी अभी तो पास आना सीखा
था

जैसे कट गए हो पंख मेरे
जो उनको पा कर पाए थे
अभी अभी तो पास आना
सीखा था

बस भूल गए काले साए को
उन जंजीर के पहरेदारों को

खता उनकी नही हमको
क्या पता ऐसा भी होता
है ख्वाब सा भी हकीकत
होता है

भीड़ देखी बहुत पर कभी
खोए नही वो अकेला
सब भुला बैठा
अभी अभी तो पास आना
सीखा था

अब लगता सब कितना अच्छा
होता है पंछी की बोली गीत लगती
फूलो की कहानी होती है
रंग रंग की निशानी होती है

किसी बताया नही हम पूछा नही
पर एक अकेला वो बिन बोले
सीखा गया बाकी सब भुला गया

बस भूल गए काले साए को
उन जंजीर के पहरेदारों को


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