अजीब दौर चल रहा है
दिल में शोर मच रहा है कैसा अजीब दौर चल रहा है।
मर रही इंसानियत इंसान इंसान को नोच खा रहा है।
अमीर हर दिन अमीर और ग़रीब-ग़रीब हो रहा है।
नशे की लत से हर युवा बर्बादी की और बढ़ रहा है।
अपनों को छोड़कर गैरों से रिश्ता बनाया जा रहा है।
ठुकरा कर अपनों को गैरों को गले...
मर रही इंसानियत इंसान इंसान को नोच खा रहा है।
अमीर हर दिन अमीर और ग़रीब-ग़रीब हो रहा है।
नशे की लत से हर युवा बर्बादी की और बढ़ रहा है।
अपनों को छोड़कर गैरों से रिश्ता बनाया जा रहा है।
ठुकरा कर अपनों को गैरों को गले...