...

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#क्या करे #
यूँ फ़क्त इश्क़ है तुमसे तो दिल क्या करे..

जो तेरी धड़कने सुने बिना, नींद न आये तो क्या करे...

माना कि होंगे चाहने वाले तेरे बहुत, अब कमबख्त तेरी निगाह क़ातिल है तो क्या करे....

कि बेज़ार (lifeless )हो जाता हूँ सोच के रुकस्ती तेरी, जो तो पास आ जाए तो हाल-ए- दिल बयां क्या करे.....

महक जाते है गुलशन तेरी खुसबू से, अब तू गुलाब है तो क्या करे.....

ये अंजुम (stars)मोहताज है तेरी चमक का,जो तेरे आगे नूर फीका महताब (chand)का पड़ जाए तो क्या करे.....

कहे तो राज खोल दू तेरी उल्फतों (beauty)के, गर तू बदनाम हो जाए तो क्या करे.....

हाँ तलब बढ़ जाती है तुझे देख के प्यासे की, अब तेरे आगे दरिया भी प्यासा हो जाए तो क्या करे......

कि तेरी साँसों की गर्मी से बुझ जाए जो शमा उसे रौशन फिर क्या खुदा करे.....

ये नजरें जो तेरी कहर सी है इन्हें देख साँसे मचल जाए तो हम क्या करे....

अब तेरे इश्क़ मे हम मुन्तज़िर (one who wait)है तो दिल क्या करे...

_@parshi

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