...

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पंख फैलाकर उड़ना है..........!
हां मुझे भी पंख फैलाकर उड़ना है ।
बस नाम की पापा की परी नहीं बनना है,
मुझे आजाद पंछी बनना है।।


मुझे पापा की परी मत बनाओ,
मैं आजाद पंछी ही ठीक हूं।
मुझे बेटा मत बनाओ, मैं बेटी ही ठीक हूं।।


बेटे के उतनी नही, मगर थोड़ी आजादी दे दो।
क्या पता पंख फैलाकर उड़ने लगूं।।
परी ना बनकर आजाद पंछी बनना है।
हां मुझे पंख फैलाकर उड़ना है।।


मुझे बाहर नही घुमना हैं,
मुझे घर में ही रहना है।
बस आजाद पंछी बन उड़ना है।।
जो कहों सब सुनू , मेरी एक सुनो यही कहना है।
हां मुझे भी पंख फैलाकर उड़ना हैं।।


मुझे परी नही,आजाद पंछी बनना हैं।
हां मुझे भी पंख फैलाकर उड़ना हैं।।


© kritika_writes