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तुम्हारी ख़ोज में ख़ुद से मिली मैं...❤️
तुम्हारी ख़ोज में ख़ुद से मिली मैं...

आज़ रात छोटी लगी..
आंख देर से खुली..
हां,याद आया..
आज़ तो तुम्हें आना था मेरे ख्वाबों में..
गमले सजा दिए थे
चाय भी तैयार कर ली थी
तुम्हारे पसंद की साड़ी पहनी थी,
सुर्ख कत्थई लाली और बिंदी भी...
जेवर नहीं पहने थे..
सोचा था कि तुम पहनाओगे,
तुम नहीं आए तो..
तो भी मेरा वक्त अच्छा गुज़रा..
मैंने वक्त बिताया अपने संग..
ख़ुद को कई बार निहारा..
तारीफें की अपनी..
कई सारी राज़दारी की बातें की,
कई बातें जिन्हें बरसों बीत गए थे..
उन्हें खुद से दोहराया..
जिन्हें तुम्हारे साथ साझाकर रो देते थे..
उन्हें खुद से करके.. संभालना आ गया..
एक भी आंसू ना आया..
कई सारे पल जो ख्वाहिश थे मेरी..
वो अपने संग जी लिए मैंने..
ख़ुद का पता चला तो लगा....
कि अब तक लापता,जाने कहां थी मैं..!!

आकांक्षा मगन "सरस्वती"