...

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कर्म
#पहचान
बनेगा जो सास्वत वही आधार होगा,
पहचान तेरा नाम अपितु काम होगा;
आख़िरी सांस लेने से पहले,
कर्म नगरिया वास बना लें
जग के ऊपर है जो अंबर
सांस चलें जो देह के अंदर
उस पर अपना नाम लिखा ले
कर्म नगरिया वास बना ले
शाश्वत सत्य कर्म गति जानेहुँ
न कर्म अधीन तो पशु वत मानेहुँ
जीवन गति कर्म बिनु वृथा
कर्म थाप बिनु मेघ न झरता
भाग्य राम भी कर्म अधीना
बिनु कारज दे सके राम भी न।।

_ सुषमा नैय्यर