...

3 views

वो जानता नही
वो जानता नहीं
यह बात अभी...की कैसे छुप-छुप कर तन्हाई मे...मै आँसू बहाती हुँ...
जब भी उससे मिलती हुँ...अपने आंसुुओ को छुपाती हुँ..
देखकर मेरी आँखों की नमी..वजह पूछता है वो कभी...
आँखों मे कुछ गिर गया है अभी...यह कह कर आँखों की नमीं को छुपाती हुँ...
खुशियों से दूर...दर्द से गहरा रिश्ता है मेरा..
हर दर्द को अपने सीने मे...मुस्कुराहट के साथ छुपाती हुँ...
देखकर दुसरो के आँसू..उनको पोंछने की... कोशिश करती हुँ....
हाँ भूल कर दर्द अपने सभी...दुसरो के दर्द पर मलहम लगाती हुँ...!!