.....चाहती हूँ
मैं कायनात से जुड़ना चाहती हूँ,
हां मै उड़ना चाहती हूँ।
सभी दिवारों को तोड़कर,
जमाने से रुख मोड़कर,
जंजीरों से खुद को छुड़ाकर,
पिंजड़े की कैद से निकलना चाहती हूँ,
हां मै उड़ना...
हां मै उड़ना चाहती हूँ।
सभी दिवारों को तोड़कर,
जमाने से रुख मोड़कर,
जंजीरों से खुद को छुड़ाकर,
पिंजड़े की कैद से निकलना चाहती हूँ,
हां मै उड़ना...