...

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🖤दर्द की अनोखी दास्तां🖤
क्या यह दर्द हमें यूं ही जीने नहीं देंगे,
रोएंगे अकेले में मगर यूं ही सोने नहीं देंगे।
अब जान चुका हूं मैं कि तुम हमारे नहीं हो सकते,
इस सच को क्या हम हकीकत होने नहीं देंगे।
याद करता हूं तुम्हारे साथ बिताए वह हसीन पल,
क्या इस पल को हम कभी भूलने नहीं देंगे।
क्या यह दर्द हमें यूं ही जीने नहीं देंगे,
रोएंगे अकेले में मगर यूं ही सोने नहीं देंगे।
अब तो दूरी भी हो चुकी है हमारे दरमियां बहुत सारी,
क्या इस दूरी को जुदाई में बदलने नहीं देंगे।
चेहरा आज भी पढ़ लेता हूं मैं तुम्हारा अक्सर,
इस चेहरे की मायूसी को हम अब छुपने नहीं देंगे।
क्या यह दर्द हमें यूं ही जीने नहीं देंगे,
रोएंगे अकेले में मगर यूं ही सोने नहीं देंगे।
ऐसा कोई दिन नहीं जिस पल तुम याद ना आते हो,
क्या इस पल को हम बीतने नहीं देंगे।
आज मानता हूं कि तुम नसीब में नहीं थे हमारे,
क्या हम नसीब की लिखावट को मिटने नहीं देंगे।
क्या यह दर्द हमें यूं ही जीने नहीं देंगे,
रोएंगे अकेले में मगर यूं ही सोने नहीं देंगे।
© -अमन2918