...

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कुछ हंसीन पल....
बीते वक़्त की कुछ बातें याद आ गयी,
हल्की मुस्कान लबों पर छा गयी।
वो दोस्तों की टोलियाँ नज़र आ गई,
सड़क पर दौड़ती साइकिलें टकरा गई।
खुशनुमा उन पलों की याद दिला गई,
बीते वक्त की कुछ बातें याद आ गयी।

टीचर का कक्षा में सवालों का पूछना,
किसी का भी उत्तर दिमाग़ में न सूझना।
फिर सबका ज़ोर से खिलखिलाके हँसना,
छुट्टी के बाद वो मटका कुल्फ़ी वो रसना।
अचानक से उन बातों की सैर करा गयी,
बीते वक्त की कुछ बातें याद आ गयी।

पेपरों के बाद मिलकर एक टीम बनाना,
सबसे पूछना घूमने किस किस को है जाना।
फ़ोन पर सबकी मम्मियों को मनाना,
पैसे का सारा जोड़ हिसाब लगाना।
वो टिक्की छोले की थड़ी याद आ गई,
बीते वक्त की कुछ बातें याद आ गयी।

खेल खेल में सारे पैसे उड़ा के आना,
घर आते ही बोलते माँ बना दो खाना।
मम्मी का चिढ़ना और पारा चढ़ जाना,
वो बोलती पैसे का क्या किया ज़रा बताना।
फिर बहाने बनाने की कला याद आ गयी,
बीते वक्त की कुछ बातें याद आ गयी।
{सम्राट}