...

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मम्मी 🤍
माँ का गले लगाकर प्यार दिखाना,
मेरे लिए चिड़चिढहट हो जाती थी,
अब थोड़ी दूर हू मम्मी से,
तो हर पल मम्मी की याद रुलाती थी,
तेरे हर रूप से चिढ़ जाना मेरा,
रुलाती है अब जब तेरे,
हाथों का खाना नही मिलता है,
सिर पर साया नही मिलता, थोड़ी नोक झोक,
तेरे हाथों से खिलाया हुआ निवाला नही मिलता,
हाथ की मार, दुलार, डांट तेरी,
सब कुछ रुलाती है माँ अब मुझे,
कितने खैरियत से सीचा है मुझे,
बनकर रोटी किसी के लिए कमाने निकला हू,
इस कदर रोपा है माँ तुने मुझे,
छत बनकर ठंड, बारिश, धूप,
सब निघल जाऊ इस कदर माटी के स्वरूप,
झेलने की छमता दी है माँ तुने मुझे,
नादान इतना बच्चों सा बिलखकर रोना, ...