...

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खेल खेलकर
भावनाओं का खेल खेलकर,
वो सब कुछ लुटकर मेरा ले गया।

छीनकर दिन का चैन, रात की नींद,
वो आँखों में मेरी आँसू दे गया।

किया जिस पर ख़ुद से ज्यादा भरोसा,
वही भरोसा तोड़कर मुझे दग़ा दे गया।

लगाकर बेवफ़ाई का इलज़ाम मुझ पर,
वो बड़ी सफ़ाई से मुझे सजा दे गया।

भावनाओं का खेल खेलकर,
वो तन्हाई को मेरे घर का पता दे गया।