...

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चरित्र
अगर कोशिश मुझे बदलने की है तो मेरे दोस्त यह कोशिश व्यर्थ है तुम्हारी दुनिया सही गलत का फर्क करके चरित्र का निर्माण करती है परंतु वह यह अनदेखा करती है कि किस परिस्थिति में यह व्यक्ति कार्य करता है यह दुनिया चरित्र से मनुष्य की तुलना करता है वह चरित्र जो उसने खुद ही निर्माण किया है इस चरित्र के कारण वह इंसानियत ही त्यागने को तैयार है परंतु यह चरित्र है क्या क्या यह कोई चीज है क्या यह कोई धन है यह कोई ज्ञान है क्या है ये यह देखकर आश्चर्य होता है की इस चरित्र के कारण मनुष्य को ऊंचा और नीचा का दर्जा दिया जाता है सुना है अगर यह खो जाए तो मनुष्य का अस्तित्व भी खो जाता है क्या यह सच है।
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