...

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# All Eyes On "Rafah" #
जल गई आग नीले गगन तक
कड़क उठी बिजलियां
उजड़ गए दिलों के चमन
दर्द की आह से रोशन है कफन
पर मगर खामोश है सब
मर गईं ज़मीर,
अरब ओ अजम से लेकर
यहुद ओ नशारा, काफिर ओ ईमान तक
तार तार होकर रुसवा हो गईं इंसानियत
खुश हो गए मगरिब के शैतान सब,
मगर बुझती हुई चिंगारी में
अभी सैलाब ए लहू बाकी है
अभी "रफाह" की राखो में
दबे, सहमे, बिलखते लाशों में
बच्चों की फरियादे बाकी है
ए दुश्मन ए खंजर
अगर तुम चलते हो तो चलते रहो
हम हुसैनी है
हमारी गर्दने बाकी है!

© —-Aun_Ansari