...

53 views

सीख जाऊंगा।
मुझ डूबते को एक तृण भी न मिले,
या मरूंगा या तैरना सीख जाऊंगा।
सांस आए न तो झटपटाने दो मुझे,
मैं भी घुटन को जीना सीख जाऊंगा।
मुझे एक बूंद भी पानी न देना अब,
दरिया किनारे प्यासा रहना सीख जाऊंगा।
हर बार अनसुना करना मेरी चीखों को,
एक रोज मैं कुछ भी न कहना सीख जाऊंगा।
मुझे छोड़ देना बिना मेरी परवाह किए,
भीड़ में भी अकेला रहना सीख जाऊंगा।
आरोप जलने का यूं ही लगाते रहो,
भीतर ही भीतर दहना सीख जाऊंगा।
सूख जायेंगे हृदय की धमनियों में प्राण।
आंसुओं के साथ बहना सीख जाऊंगा।
रहूं चाहे प्रतिक्षा में, गर लौट के आओगे,
कि तुम्हें देर हुई, ये कहना सीख जाऊंगा।
© Prashant Dixit