...

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ना स्वामित्व है मेरा तुमपे
ना स्वामित्व है मेरा तुमपे,
ना कोई कटु आधार है,
जीवन जिने से मरने तक,
मोह का सब द्वार है,
है प्रथा सभी की स्वार्थ वहम का,
द्वेष विरोध विकार है,
आदेश नही मेरा तुमको,
बस जीवन का आधार है,
उल्लास हो तुमको या वियोग,
महिमा तो अपरम्पार है,
ना स्वामित्व है मेरा तुमपे,
ना कोई कटु आधार है ।
© Ambuj Pathak