पिंजरा एक रूह कि कैद का.......!! नग्नावाली
पिंजरा एक रूह कि कैद का....!!
बोलकर उसने दिया एक उजागर किया होगा,
मगर फिर उस दिपक की दीप की वो लौ-
ना मेरी ना तेरी थी क्योंकि वह ना मैं था और ना
तू थी,
और अब इतना ही बोल सकता हूं कि -
यह जिस्म मेरा था मगर रूह तेरी थी,
हां मैंने कहा कि ये जिस्म मेरा था मगर रूह तेरी थी,
वह...
बोलकर उसने दिया एक उजागर किया होगा,
मगर फिर उस दिपक की दीप की वो लौ-
ना मेरी ना तेरी थी क्योंकि वह ना मैं था और ना
तू थी,
और अब इतना ही बोल सकता हूं कि -
यह जिस्म मेरा था मगर रूह तेरी थी,
हां मैंने कहा कि ये जिस्म मेरा था मगर रूह तेरी थी,
वह...