किरदार ही मैं कुछ ऐसा हु
शीशे सा नाजुक है मन मेरा
मगर दीवार जैसा दिखता हु
कांटो की तरह है जीवन मेरा
पर बाजार में
गुलाब जैसे बिकता हु
वैसे तो अकेले हर रात
खामोश शीतल
दाग से भरे चांद सा हु मैं
पर दिन में दाग...
मगर दीवार जैसा दिखता हु
कांटो की तरह है जीवन मेरा
पर बाजार में
गुलाब जैसे बिकता हु
वैसे तो अकेले हर रात
खामोश शीतल
दाग से भरे चांद सा हु मैं
पर दिन में दाग...