...

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जिंदगी....
ज़िन्दगी का सफर

कभी तेरी तो कभी मेरी हैं,
कभी उसकी तो कभी इसकी हैं,
ज़िन्दगी

कभी तिनके तिनके पर पड़ी खुशियां हमारी हैं,
तो कभी सफेद पन्नों के चारों और रंगों की स्याही से भीगी हैं,
ज़िन्दगी

कुछ एहसासों की गहराई में बन्द हैं,
कुछ अधूरी ख्वाहिशों के टूटे जज़्बात हैं, ज़िन्दगी

कभी धूप तो कभी छाया हैं,
कभी सच तो कभी माया हैं,
ज़िन्दगी

किसी के लिए सरताज हैं,
तो कभी दो वक़्त की रोटी की मोहताज हैं,
ज़िन्दगी

कोई रो-रोकर निकाल रहा हैं,
किसी के लिए एक बिंदास अंदाज हैं,
ज़िन्दगी

कोई ठोकरों से टूट गया हैं,
देखो किसी ने दूसरों कि सजाई हैं, ज़िन्दगी ।।
{VKसम्राट}