...

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जीवन और संघर्ष
यह जीवन कितना सुंदर है,
रंगों से ही जीवन जगमग है।

तितली बोली जीवन जगमग है,
गर संघर्ष तुम्हारा उत्कर्ष है।
तितली की सुंदरता के पीछे
तितली की आजादी के पीछे
कोया नमक बंधन से उसका संघर्ष प्रबल है।

एक कोने में बैठी चींटी बोली
यह जीवन जगमग है,
गर संघर्ष तुम्हारा उत्कर्ष है।
चींटी की मजबूती के पीछे
चींटी की कर्मठता के पीछे
आंधी जैसी बाधाओं से उसका संघर्ष चरम है।

यह जीवन जगमग है,
गर संघर्ष तुम्हारा उत्कर्ष है।
नभचर के साहस के पीछे
नभचर की हठ के पीछे
अनंत आकाश से उसका संघर्ष अजर है।

यह है जीवन जगमग है,
गर संघर्ष तुम्हारा उत्कर्ष है
गर संघर्ष तुम्हारा उत्कर्ष है।

कृति 'नवी'

© Navi