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Nafarat
मुझसे नफरत की अजब राह निकाली उसने,
हसता हुआ मेरा दिल कर दिया खाली उसने।
मेरे घर की रिवायत से वो खूब था वाकिफ,
जुदाई मांग ली बन के सवाली उसने।

कभी उसने भी हमे चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था।
सुना है आज उसे हमारे जिक्र से भी नफरत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।

चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह,
देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह।
जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों,
सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।

प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना,
अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना।
वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे,
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।

नफरतें लाख मिलीं पर मोहब्बत न मिली,
ज़िन्दगी बीत गयी मगर राहत न मिली।
तेरी महफ़िल में हर एक को हँसता देखा,
एक मैं था जिसे हँसने की इजाजत न मिली।

इश्क़ करे या नफरत इजाज़त है उन्हें,
हमे इश्क़ से अपने कोई शिकायत नहीं।

दुनिया को नफरत का यकीन नहीं दिलाना पङता,
मगर लोग मोहब्बत का सबूत ज़रूर मागते हैं।

है खबर अच्छी के आजा मुँह तेरा मीठा करें,
नफरतें तेरी हुई है बा-खुशी दिल को कबूल।

पहले इश्क़ फिर दर्द फिर बेहद नफरत,
बड़ी तरकीब से तबाह किया तुमने मुझको।

झूठी नफरत को जताना छोड़ दे,
भिगों के खत मेरा जलाना छोड़ दे।

फूलो के साथ काटें भी मिल जाते हैं,
खुशी के साथ गम भी मिल जाते हैं।

यह तो मजबूरी हैं हर आशिक़ कि,
वरना प्यार में नफरत कोई जान बुझ कर नहीं करता।

उसकी नफरतो को धार किसने दी,
मोहब्बत के हाथों तलवार किसने दी।

अगर इंसान खुशी चाहते हैं,
तो फिर क्यों दिल में नफरत पालते हैं।

थी नफरत अक्स से वो आईना तोड़ना सिख गया,
वो अपनी गलती पर भी मुँह मोड़ना सिख गया।
© parth