#तेरे आंगन का फ़ूल
@vishnukashyapji
#तेरे आंगन का फ़ूल
तेरे आंगन में मैं पली बड़ी, तेरा हाथ पकड़ मैं हुई खड़ी,
तेरे हाथों की उंगलियां पकड़ कर, इस आंगन में मैं चली फ़िरी,
मेरी हर इच्छाओं का माली बनकर, तू उनको पूरा करता है,
बाबुल तेरा अंगना फ़िर, क्यों दो दिन का ठिकाना है !
बाबुल तूने अपनी नजरों से, एक पल भी मुझे न औझल होने दिया,
साया बनकर साथ चले तूम, कोई न कांटा पैरों तले मेरे चुभने दिया,
मेरी हर इच्छाओं की खातीर तुमने, अपनी खुशी को त्याग दिया,
फ़िर क्यों...
#तेरे आंगन का फ़ूल
तेरे आंगन में मैं पली बड़ी, तेरा हाथ पकड़ मैं हुई खड़ी,
तेरे हाथों की उंगलियां पकड़ कर, इस आंगन में मैं चली फ़िरी,
मेरी हर इच्छाओं का माली बनकर, तू उनको पूरा करता है,
बाबुल तेरा अंगना फ़िर, क्यों दो दिन का ठिकाना है !
बाबुल तूने अपनी नजरों से, एक पल भी मुझे न औझल होने दिया,
साया बनकर साथ चले तूम, कोई न कांटा पैरों तले मेरे चुभने दिया,
मेरी हर इच्छाओं की खातीर तुमने, अपनी खुशी को त्याग दिया,
फ़िर क्यों...