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फूल चमन में खिले हैं बहार मौसम में आया है
फूल चमन में खिले हैं
बहार मौसम में आया है
हे प्रिय श्री
तेरी जैसी राग आज कोयल ने सुनाया है

पूरब में सूर्य लाली उगी
ऐसे जैसे तुमने मुस्कूराया है
नव पथिक बहार आया
जैसे तुमने मिलने आया है

घटा बादल रिमझिम रिमझिम बरशि
जैसे तुमने पायल छंकाया है
चांद निकलकर मुकुट पर छाया
जैसे तुमने मुखड़ा दिखाया है

तेरी इस रंग को देखकर
आंखें मेरी लजाया है
तेरी रूप हर उन चीजों में दिखा
जिसे मैंने हाथ लगाया है

तुम कब आओगी कहों न
अंधेरा तमस बढ़ाया है
तेरे बिछड़े लग रही सदी हो गई
ऐसा पुरवाई ने आभास कराया है

देखों जमाने की तरफ
सब लौट कर आया हैं
एक तुम्ही नहीं आई हो अब तक
बाकी सब अपना अपना स्थान पर पुनः आया है

राह नयन इंतजार में तड़प रही
दिल ने बहुत कष्ट उठाया है
मन हर पल हर छन पनघट पनवारी से पूछ रही
आखिर तुम क्यों नहीं समय के साथ लौट आया है

फूल चमन में खिले,,,,,
© Sandeep Kumar