...

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पराकाष्ठा ✍️✍️✍️
दूर रहने की सोचता हूँ तो अक्सर अकेला हो जाता हूँ !
जब तुम्हारे बारे में सोचता हूँ कुम्भ मेला हो जाता हूँ !!
मुझे डर नहीं लगता की ऐसा न हो की भीड़ में खो जाऊं !
आतुरता इस बात की है मेरी प्रिये कैसे मै तेरा हो जाऊं !!
मेरा मन तुमसे मिलकर वापस आने से इंकार करता है !
कम्बख्त मेरा है और मुझसे तुम्हारे लिए यलगार करता है !!
तुम जो लौटी तो शरद ऋतु अब मनोहर...