दिल के वस्त्र फटे हुए हैं
अपने अपनो से कटे हुए हैं
शहर के मकान ज्यों सटे हुए हैं।
खोल के रख दो,चाहे दिल की पोथी
हर सवाल के जवाब रटे हुए हैं।
मन...
शहर के मकान ज्यों सटे हुए हैं।
खोल के रख दो,चाहे दिल की पोथी
हर सवाल के जवाब रटे हुए हैं।
मन...