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ज़िन्दगी की एहमियत - my beloved mentor
ज़िन्दगी की एहमियत

(Dedicated to my beloved Mentor)

आज एक अपनें का हाथ छूटा
एक प्यारा सा शक्श हमसे रूठा
ज़िन्दगी की एहमियत दिखा गया हमको
तकलीफों में हंसना सीखा गया हमको

साथ न हो भले अब उनका
मिलों दूर से अब वो देखेंगे
कहानी किस्सों की याद दिलाकर
यादों से हम सब को घेरेंगे

खुशी से चले अब नई डगर पर
पीछे हमको भी न छोड़ा है
उनके साथ की गई हर गलती पर
मैंने आज हाथ जोड़ा है

भूलेंगे न हमें भुलाएंगे
साथ रहें सब ये ही बस चाहेंगे
प्रभु की इच्छा समझों इसको
वो जहां भी है मुस्कुराएंगे

© firkiwali